लेखनी कहानी -04-Jun-2023
® मधुर मिलन ®
मीरा बहुत ही मधुर स्वभाव की नारी थी , बहुत कम बोलती थी , उसके कॉलेज का लड़का अविनाश उसके इस स्वभाव को जानता था और उसके पीछे पड़ा रहता था , लेकिन मीरा किसी भी लड़के में कोई दिलचसपी नहीं रखती थी । वो अपने माता पिता का सम्मान करती थी संस्कृति को ही अपना भगवान समझती थी शिक्षा का माध्यम बस ज्ञान प्राप्त करना व अपना केरियर बनाना न की लैला मजनू के किस्से सुनना सुनाना । और ऐसे लड़कों को तो वो अछूत मानती थी । जो मनचले हों । अविनाश अमीर माँ बाप की इकलोती संतान उसके इस आचरण से अनभिज्ञ बस उसको लुभाने में लगा रहता।
एक दिन तो उसने हद कर दी क्लास में सबके सामने उसकी सीट पर जा बैठा । बोला तू चाहती है मैं तेरे तरले करता रहूँ । इतना भी नखरा क्या बात ही नहीं करती । मीरा ने सोचा मौका अच्छा है , बोली मिस्टर आप जो कोई भी हों एक सहपाठी के नाते बस मैं आपको जानती हूँ इस से आगे मेरा आपसे कोई वास्ता नहीं । और आप भी इस बात को एक बार में समझ लीजिए ।
अविनाश का मुँह फक्क हो गया सारी क्लास देख रही थी । बोल न निकला उसके मुंह से कोई । चुपचाप उठ कर अपनी सीट पे जा बैठा । उस दिन से उसने प्रण कर लिया अब कभी उस की मरजी के बिना उस से बात नहीं करेगा ।
वे दोनों फाइनल वर्ष में थे और परीक्षा को मात्र 5 महीने । बात आई गई हो गई । मीरा यू पी एस सी की तैयारी भी कर रही थी । ये बात किसी को नहीं मालूम थी उधर अविनाश चूंकि उसको फॉलो करता था सो अकेला वो ही ये बात जानता था । अब तक वो मनचला था लेकिन उस दिन के बाद उसकी चंचलता गायब हो गई । और उसने भी यू पी एस सी की तैयारी शुरू कर दी । अब यू पी एस सी की तैयारी उसके जीवन का उद्देश्य व मीरा उसकी प्रतियोगिता बन चुकी थी ।
इधर सभी अपने अपने तरीके से फाइनल परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे थे । तभी ऐन्यूअल डे का नोटिस लगा । कॉलेज में जैसे सुस्ताए मौसम में बहार आ गई । सभी किसी न किसी ईवेंट में भाग ले रहे थे । म्यूजिक की अध्यापिका मिस मालिनी ने मीरा को स्टाफ रूम में बुलाया बोली मैं चाहती हूँ तुम भी किसी ईवेंट में भाग लो बस मेरा आग्रह है । मीरा मना न कर सकी बोली मेम ठीक है , मैं सोलो गीत सुनाऊँगी । देश भक्ति पर जो मेरा ही लिखा है । मुझे अपने देश के सैनिकों पर बहुत गर्व है । अगले सोमवार को ऐन्यूअल डे था । मीरा के पिता उसमें चीफ गेस्ट थे , ये बात मीरा को उस वक्त ही पता चली ।
वे पूर्व सैनिक व स्वतंत्रता सैनानी भी थे - वो एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे । शायद यही कारण रहा होगा मीरा का अपने देश के सैनिकों पर बहुत गर्व होना , ये उसके खून में शामिल था । पाँचवे नंबर पर मीरा का प्रोग्राम आया । और जब उसने अपने सुरीले स्वर मैं स्वरचित देश भक्ति गीत सुनाया सम्पूर्ण कॉलेज में सन्नाटा छा गया , सबकी आंखे नम हो आई । 4 मिनट के उस गीत में सुई भी गिर जाए तो उसकी आवाज सुनाई दे , ऐसा महोल । गीत की समाप्ति पर पूरा पंडाल 5 मिनट तालियों से गूँजता रहा । और मीरा हाथ जोड़ सबको नमन करती रही । उसके पिता सन्न रह गए की उनकी बेटी इतनी सुंदर गले की मालिक है । प्रिंसिपल महोदय , मालिनी मेम तो स्तब्ध थे । सभी छात्र छात्राएं व विशेष तौर पे अविनाश तो विस्मय से भौचक रह गए । मीरा को म्यूजिक में गोल्ड मेडल मिल उधर अविनाश को भी क्रिकेट में गोल्ड मिला था वो उसका प्रिय खेल था ।
एक महीने बाद परीक्षा हुई । उसके साथ साथ 5 बच्चे पचासी प्रतिशत नंबर से पास हुये । अविनाश के चौरासी प्रतिशत मार्क्स थे । अब तक तो मन ही मन उसको अपनी जीवन संगिनी बनाने का निर्णय कर चुका था और अब किसी भी प्रकार से उसके मन में अपने प्रति नफरत नहीं आने देना चाहता था । उधर 5 माह बाद यू पी एस सी की परीक्षा हुई । 3 माह बाद रिजल्ट आया । और हैरानी की बात जेनरल केटेगरी में उसके शहर से 4 बच्चे सेलेक्ट हुये उनमे से एक वो ओर एक अविनाश था । लेकिन उसको ये बात नहीं मालूम थी । मात्र अविनाश ये बात जानता था ।
जब ट्रैनिंग के लिए उसके पिता गर्व से उसको अकेडमी छोड़ने गए , उधर अविनाश के माता पिता भी उसको छोड़ने आए थे । और सभी केनडीडेट के परिचय समारोह के दौरान वो अविनाश को वहाँ देख भौचक रह गई । उसके विस्मय की सीमा न रही । अब इसी अवसर का लाभ लेते हुये अविनाश अपने माता पिता के साथ उनके पास आया । उसके पिता के पाँव छूते हुये उसने मीरा को प्रणाम किया । तब मीरा को विस्मय जन्य खुशी के साथ उसका परिचय अपने पिता से कराना ही पड़ा । दोनों के माता पिता अपने बच्चों की इस उपलब्धि से बहुत खुश व गर्व महसूस कर रहे थे । यहाँ अविनाश ने अपने अंदर उक्त परिवर्तन का श्रेय मीरा को देते हुये अपनी धृष्टता का किस्सा सभी को सुना डाला । साथ ही बोला आज यदि मैं इस जगह हूँ तो मात्र मीरा के कारण । यदि मीरा मुझे उस दिन इस तरह न डांटती तो शायद मैं यहाँ की सोच भी नहीं सकता था । साथ ही मीरा से माफी मांगते हुये अपने दोनों कान पकड़ कर रोने लगा । सभी के मन साफ हो गए । मीरा ने उसे माफ कर दिया । ये मिलन एक ऐसा मिलन था जो इन्सान के जीवन में आए बदलाव का सच्चा सुन्दर और सुखद पहलू भी था ।
डॉ अरुण कुमार shast